ड्रोन से लेकर AI वाली पढ़ाई तक… भारत-इजरायल के बीच हुए 27 समझौतों की बड़ी बातें – india israel agreements big highlights strategic deal modi visit ntc rlch

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Written by Hemant Gowda

February 26, 2026



इजरायल का दो दिवसीय दौरा पूरा करके प्रधानमंत्री मोदी वापस भारत लौटने के लिए निकल चुके हैं. पीएम मोदी को विदा करने के लिए इजरायली पीएम नेतन्याहू और उनकी पत्नी एयरपोर्ट आए थे. दोनों नेताओं के बीच दिखी आत्मीयता और कार के भीतर की उनकी तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. महज 27 घंटे के इस दौरे में भारत और इजरायल के बीच 27 अहम समझौतों पर सहमति बनी, जिसने द्विपक्षीय रिश्तों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के नए स्तर पर पहुंचा दिया.  और पढ़ें

यात्रा के दौरान पीएम मोदी को इजरायल की संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ प्रदान किया गया. वह नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने. अपने संबोधन में उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और दशकों पुराने विश्वास का उल्लेख किया. पीएम मोदी ने यरुशलम स्थित होलोकॉस्ट स्मारक याद वाशेम में श्रद्धांजलि अर्पित की और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का संदेश दिया.

भारत-इजरायल समझौते की 5 बड़ी बातें

सरकार के अनुसार, इन समझौतों का दायरा साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि नवाचार, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मुक्त व्यापार तक फैला है. प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-

1. साइबर सुरक्षा सहयोग: इजरायल भारत में अत्याधुनिक साइबर सिक्योरिटी सेंटर स्थापित करने में सहयोग करेगा. इससे साइबर हमलों की रोकथाम, नेटवर्क मॉनिटरिंग और डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलेगी.

2. एआई आधारित शिक्षा: स्कूलों खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक एआई तकनीक आधारित शिक्षण सामग्री पहुंचाने में इजरायली तकनीक का उपयोग होगा. इससे डिजिटल शिक्षा का दायरा बढ़ेगा.

3. एग्रीकल्चर इनोवेशन सेंटर: इजरायल भारत में एग्रीकल्चर इनोवेशन सेंटर स्थापित करेगा. ड्रिप इरिगेशन, स्मार्ट फार्मिंग और उन्नत बीज तकनीक के जरिए फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

4. रक्षा और एडवांस टेकनोलॉजी: ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस, रोबोटिक्स और संयुक्त उत्पादन (जॉइंट डेवलपमेंट) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा. दोनों देश रक्षा प्रौद्योगिकी के साझा विकास और ट्रांसफर पर भी सहमत हुए हैं.

5. मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए): दोनों देशों ने जल्द मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया. इससे निवेश, निर्यात और टेक्नोलॉजी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.

‘टाइम-टेस्टेड’ साझेदारी

भारत और इजरायल के बीच जो 27 अहम समझौते हुए हैं, वो पीएम मोदी और नेतन्याहू की पर्सनल केमिस्ट्री का नतीजा है. भारत के लिए इजरायल टाइम-टेस्टेड पार्टनर हैं और दोनों मुल्कों के मजबूत रि श्तों के पीछे एक गजब का संयोग है. बीते दिन इजरायली संसद को संबोधित करते वक्त PM मोदी ने अतीत के पन्नों को पलटा और अपने जन्मदिन की तारीख याद दिलाते हुए इजरायल-भारत के रिश्तों की नींव से जुड़ा एक किस्सा सुनाया.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-इजरायल संबंध ‘टाइम-टेस्टेड’ हैं और साझा विश्वास पर आधारित हैं. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ, वही दिन जब भारत ने आधिकारिक रूप से इजरायल को मान्यता दी थी. इस ऐतिहासिक संयोग का जिक्र कर उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों की जड़ों को रेखांकित किया.

वहीं, नेतन्याहू ने भी भारत के प्रति अपने विशेष लगाव का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि पत्नी सारा से उनकी पहली मुलाकात एक भारतीय रेस्त्रां में हुई थी. निजी जीवन से जुड़े इस प्रसंग ने दोनों देशों के रिश्तों में मानवीय आयाम जोड़ दिया.

वैश्विक संदेश: शांति और संतुलन

इजरायल की धरती पर खड़े होकर पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि इंसानियत को टकराव का बंधक नहीं बनाया जा सकता. यह संदेश पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच संतुलित कूटनीति का संकेत माना जा रहा है. उन्होंने फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के शांतिपूर्ण समाधान और संवाद की आवश्यकता दोहराई. इससे पहले भी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात में मोदी ने कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है. इजरायल यात्रा के दौरान भी उनका रुख यही रहा भारत शांति, संवाद और मानवीय मूल्यों का समर्थक है.

बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग

बता दें कि भारत और इजरायल, अमेरिका व यूएई के साथ मिलकर I2U2 समूह में काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग बढ़ाना है. इसके अलावा इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के जरिए आर्थिक संपर्क और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी साझेदारी बढ़ रही है.

पीएम मोदी की यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. गाजा संघर्ष, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर भारत ने संतुलित रुख अपनाया है एक ओर आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश, दूसरी ओर मानवीय सहायता और शांति प्रक्रिया का समर्थन.
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